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GST लागू होने के 6.5 वर्षों बाद आज देश में अप्रत्यक्ष कर संग्रहण में लगातार हो रही तेज वृद्धि से सुखद परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

एक सरकारी सूत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए भारत का राजकोषीय घाटा सरकार के शुरुआती अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करने का अनुमान है।

स्टेट बैंक चेयरमैन के अनुसार मजबूत निवेश मांग और बेहतर व्यापार और उपभोक्ता भावनाओं को प्रमुख चालक बताया गया।

‘गरीबी हटाओ’ के नारे के साथ राजनीतिक दलों ने कई बार सत्ता हासिल की किंतु देश से गरीबी हटाने के गम्भीर प्रयास शायद कभी नहीं हुए।

CRISIL के विश्लेषण में उल्लेखनीय उछाल का अनुमान लगाया गया है। जिसमें अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027-28 तक भारतीय वाहक देश के अंतर्राष्ट्रीय यात्री यातायात के 50% तक का नियंत्रण करेंगे।

डेटा विभिन्न क्षेत्रों में ऋण देने की एक सूक्ष्म तस्वीर दिखाता है। उद्योग खंड में, बैंक ऋण में साल-दर-साल 9% की वृद्धि हुई, जिसमें एमएसएमई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

बढ़ती इनपुट लागत जैसी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, मैनुफैक्चरिंग सेक्टर ने बेहतर मांग के कारण अच्छा मार्जिन सुनिश्चित करने में कामयाब रहा।

नीलसन द्वारा किए गए एक सर्वे के यह बताया गया है कि जनवरी एवं फरवरी 2024 माह में भारत में विभिन्न उत्पादों की शहरी क्षेत्रों में मांग 1.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

ई-कॉमर्स उद्योग की विशेषता छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) की भागीदारी है जो विविध प्रकार के उत्पादों का निर्यात करते हैं।